निर्वासित तिब्बती संसद के उप-सभापति आचार्य यशी बोले-मसले के हल के लिए चीन से बात बेहद जरूरी
छह दशक से अधिक समय से तिब्बत की आजादी को संघर्ष चल रहा है। इसी संघर्ष के बीच मंगलवार को निर्वासित तिब्बती संसद के उप-सभापति आचार्य यशी ने अपनी राय रखी है। आज प्रेसवार्ता में आचार्य यशी ने कहा कि इस संघर्ष को फलीभूत करने के लिए चीन के साथ बात किया जाना जरूरी हैं। कम से कम 2 से 3 बार बात होगी, तब कहीं इस मसले का हल निकल सकता है।
निर्वासित तिब्बती संसद के उप-सभापति आचार्य यशी ने बताया कि आगामी रविवार 3 जनवरी 2021 को निर्वासित तिब्बती संसद के चुनाव हैं। तिब्बती समुदाय के लोगों के आह्वान पर वह प्रधानमंत्री पद के लिए खड़े हुए हैं, इसलिए मतदान का अधिकार तिब्बती समुदाय के 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग उस दिन अपने अधिकार का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि वह सभी लोगों में प्रजातंत्र और लोकतंत्र में सहभागिता का आह्वान करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि धर्मगुरु दलाईलामा भी लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाने पर बल देते हैं।
यशी कहा कि यह चुनाव तिब्बत आंदोलन को तेजी देने के लिए है। तिब्बत की एकता के लिए भी जरूरी है। ऐसे में उन्होंने अपने घोषणा पत्र में मुख्य रूप से तिब्बत का संघर्ष, तिब्बती समाज में स्थिरता व मुद्राकोष में बढ़ावा देना मुख्य बिंदू रखे हैं। बिना मुद्रा के कुछ नही चल सकता, इसलिए विश्व मुद्राकोष बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के 30 देशों में तिब्बती लोग रहते हैं। जो लोग निर्वासन में रहते हैं, उन्हें इस चुनाव में भाग लेना चाहिए। दलाईलामा से निर्वासन की शुरुआत से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 33 वर्ष भारत में रहते हुए बनारस और शिमला में शिक्षा ली। अनेक साल तिब्बत संघर्ष में काम किया है और प्रशासनिक काम किए हैं।
61 साल में 20 बार चीन प्रतिनिधि से मिले तिब्बती प्रतिनिधि
यशी की मानें तो संघर्ष को लेकर 61 साल में तिब्बती प्रतिनिधि 20 बार चीन प्रतिनिधि से मिले। पहले पहल धर्मगुरु दलाईलामा व निर्वासित तिब्बती संसद के प्रतिनिधि चीन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करते थे और चीन सरकार भी वार्ता के लिए राजी हो जाती थी। 2008 में भी जब 20वीं वार्ता हुई तो उसमें उन्हें तिब्बत स्वायत्तता को लेकर पत्र दिया, लेकिन चीन शासन के साथ 2011 के बाद वार्ता ही नहीं हो पाई है। इस मसले पर चीन से भेंट करना जरूरी हैं। कम से कम 2 से 3 बार वार्ता होना जरूरी है, तभी हल निकलेगा। तीन-चार पीढ़ियों से आजादी की लड़ाई लड़ रहे तिब्बती लोगों के बलिदान फलीभूत होंगे।
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